गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात के भुज में भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित G-7 बॉर्डर आउट पोस्ट पर जवानों से संवाद और G-7 एवं G-13 बॉर्डर आउट पोस्ट का लोकार्पण किया

G-7 G-13 बॉर्डर आउट पोस्ट उद्घाटन

गुजरात के भुज में भारत–पाकिस्तान सीमा पर स्थित G-7 बॉर्डर आउट पोस्ट पर आज एक महत्वपूर्ण अवसर देखने को मिला, जब केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वहां तैनात सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों से संवाद किया और G-7 तथा G-13 दोनों बॉर्डर आउट पोस्ट का औपचारिक लोकार्पण किया। इस कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल सहित केंद्रीय गृह सचिव, IB निदेशक, सीमा प्रबंधन सचिव और बीएसएफ के महानिदेशक जैसे कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में गृह मंत्री ने कहा कि बीएसएफ के जवान देश की सबसे कठिन सीमाओं पर बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में डटे रहते हैं। उन्होंने कहा कि कहीं कच्छ का तपता रेगिस्तान हो, तो कहीं सरक्रीक और हरामी नाले जैसी दलदली जमीन, और कहीं राजस्थान के रेत के टीले—इन सभी परिस्थितियों में जवान लगातार देश की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कश्मीर की बर्फीली चोटियों से लेकर सुंदरबन और पूर्वोत्तर के घने जंगलों तक बीएसएफ ने हमेशा “फर्स्ट लाइन ऑफ डिफेंस” के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाई है।

अमित शाह ने बलिदान और समर्पण का उल्लेख करते हुए बताया कि बीएसएफ के लगभग 2000 जवान देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दे चुके हैं, जो पूरे राष्ट्र के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने यह भी कहा कि इसी कारण देश की 140 करोड़ जनता बीएसएफ पर भरोसा करती है और चैन की नींद सो पाती है।

उन्होंने सीमा सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। इसमें वॉच टावर, सड़क संपर्क, पेयजल, चिकित्सा सुविधाएं और नई फेंसिंग जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से एक “लीक-प्रूफ” सुरक्षा ग्रिड तैयार करने की योजना शामिल है। उनका कहना था कि आने वाले समय में यह क्षेत्र तकनीक और आधुनिक ढांचे के जरिए और अधिक सुरक्षित बनाया जाएगा।

गृह मंत्री ने आगे कहा कि सरकार “स्मार्ट बॉर्डर सिक्योरिटी प्रोजेक्ट” के तहत ड्रोन, रडार और अत्याधुनिक तकनीकों के उपयोग से सीमा सुरक्षा को नए स्तर पर ले जा रही है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में सुरक्षा व्यवस्था को और व्यापक बनाते हुए “चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड” की अवधारणा पर काम किया जाएगा, जिसमें बीएसएफ के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।

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